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UCC को लेकर जीतन राम मांझी ने साफ किया रुख, तीन तलाक और धारा 370 का जिक्र कर मोदी सरकार के फैसले का किया समर्थन

लाइव सिटीज, पटना: समान नागरिक संहिता को लेकर बिहार में जारी राजनीतिक बहस के बीच केंद्रीय मंत्री और हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के संरक्षक जीतन राम मांझी ने अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने संविधान में समानता के अधिकार का हवाला देते हुए UCC के अनुपालन को लेकर किसी तरह के दांव-पेच की चर्चा को गैर-संवैधानिक बताया।

‘बाबा साहेब का संविधान समानता का अधिकार देता है’

जीतन राम मांझी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर का संविधान देश की धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था पर आधारित है। उनके मुताबिक, संविधान नागरिकों को समानता का अधिकार देता है और इसी संवैधानिक भावना को ध्यान में रखते हुए UCC को देखा जाना चाहिए।

मांझी ने अपने बयान में कहा कि समान नागरिक संहिता के अनुपालन में किसी तरह के ‘दांव-पेच’ की बात करना उनकी समझ में गैर-संवैधानिक है।

मोदी सरकार के फैसले का किया समर्थन

केंद्रीय मंत्री ने UCC को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के फैसले का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने समान नागरिक संहिता को लागू करने का निर्णय काफी सोच-विचार के बाद लिया है।

मांझी के इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि UCC के मुद्दे पर वह केंद्र सरकार के रुख के साथ खड़े हैं। उन्होंने अपने पोस्ट में UCC को संविधान में निहित समानता के अधिकार से जोड़कर अपनी बात रखी।

तीन तलाक और अनुच्छेद 370 का भी संदर्भ

जीतन राम मांझी ने UCC पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए तीन तलाक और अनुच्छेद 370 का भी उल्लेख किया। उनका बयान ऐसे समय आया है जब केंद्र सरकार की ओर से UCC को लेकर राज्यों में आगे बढ़ने की बात कही जा रही है।

गृह मंत्री अमित शाह ने हाल में कहा था कि NDA के नेतृत्व वाली सरकारें 2029 से पहले 21 राज्यों में UCC लागू करने की दिशा में आगे बढ़ेंगी। उन्होंने सरकार के पिछले फैसलों में तीन तलाक और अनुच्छेद 370 से जुड़े कदमों का भी उल्लेख किया था।

बिहार की राजनीति में UCC पर बढ़ी चर्चा

अमित शाह के बयान के बाद बिहार में UCC को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हुई है। NDA के भीतर भी इस मुद्दे पर नेताओं के अलग-अलग रुख सामने आए हैं। जेडीयू की ओर से जहां इस मामले में पहले प्रस्ताव और उसके प्रावधानों को समझने की बात कही गई, वहीं पार्टी के कुछ नेताओं ने बिहार में इसे लागू करने को लेकर आपत्ति जताई है।

इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में जीतन राम मांझी का बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने अपने एक्स पोस्ट के जरिए UCC को लेकर किसी अस्पष्टता के बजाय संविधान में समानता के अधिकार और केंद्र सरकार के निर्णय का हवाला देते हुए अपना पक्ष रखा है।

मांझी के बयान का मुख्य संदेश

मांझी ने अपने पोस्ट में मूल रूप से तीन बातों पर जोर दिया—संविधान की धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था, नागरिकों का समानता का अधिकार और UCC को लेकर केंद्र सरकार का निर्णय। उनका कहना है कि UCC के अनुपालन को लेकर किसी तरह के दांव-पेच की बात करना उचित नहीं है और इसे वह गैर-संवैधानिक मानते हैं।बिहार में UCC को लेकर आगे राजनीतिक दल और गठबंधन के घटक किस तरह अपनी स्थिति रखते हैं, यह आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर होने वाली चर्चा का अहम हिस्सा होगा।

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