लाइव सिटीज, छपरा: छपरा जिले में लगातार बढ़ रहे जलस्तर के बीच बाढ़ का संकट और गहरा गया है। जिले से गुजरने वाली गंगा, सरयू, सोन और गंडक नदियां उफान पर हैं। चारों नदियों के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। गंगा का जलस्तर भी अपने पुराने रिकॉर्ड के बेहद करीब पहुंच गया है। बताया जा रहा है कि नदी का पानी रिकॉर्ड स्तर से महज करीब चार इंच नीचे है।
इसी बीच शनिवार को दिघवारा के त्रिलोकचक के पास मही नदी का बांध करीब 17 फीट तक टूट गया। बांध टूटने के बाद तेजी से पानी आसपास के इलाकों में फैलने लगा। शुरुआती जानकारी के अनुसार करीब आठ गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। कई ग्रामीण इलाकों में लोगों के सामने आवागमन और रोजमर्रा की जरूरतों को लेकर मुश्किलें खड़ी हो गई हैं।
बाढ़ का असर छपरा-पटना मुख्य मार्ग पर भी दिखाई देने लगा है। नेशनल हाईवे-19 पर सिंगही और डुमरी के आसपास सड़क पर पानी चढ़ गया है। सड़क पर पानी आने से आसपास के करीब दो दर्जन गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। इससे ग्रामीणों के साथ-साथ मुख्य सड़क से आने-जाने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।ग्रामीण इलाकों में पानी बढ़ने के साथ प्रशासन के सामने लोगों तक राहत पहुंचाने और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की चुनौती बढ़ गई है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठने के बाद अधिकारियों की सक्रियता बढ़ी है। स्थानीय स्तर पर सामने आई स्थिति के बाद डीएम समेत जिला मुख्यालय के कई अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे और हालात का जायजा लिया। अधिकारियों ने जलस्तर, तटबंध और प्रभावित गांवों की स्थिति की जानकारी ली तथा जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए।
प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर भी शुरू किया गया है, ताकि बाढ़ से घिरे परिवारों को सुरक्षित जगह मिल सके। जरूरत के अनुसार लोगों को राहत शिविरों तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की जा रही है।
बाढ़ का असर छपरा शहर से सटे इलाकों में भी देखा जा रहा है। सीढ़ी घाट, रावलटोला समेत आसपास के इलाकों में मेडिकल कैंप लगाए गए हैं। इन कैंपों के जरिए प्रभावित लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, स्थानीय स्तर पर लोगों की शिकायत है कि मेडिकल सुविधा शुरू होने के बावजूद राहत सामग्री का वितरण अभी तक पर्याप्त रूप से शुरू नहीं हो पाया है। बाढ़ प्रभावित परिवारों को भोजन, पीने का पानी और अन्य जरूरी सामान की जरूरत है। ऐसे में प्रशासन के सामने अब राहत सामग्री को तेजी से प्रभावित इलाकों तक पहुंचाने की चुनौती है।
गंगा, सरयू, सोन और गंडक के बढ़ते जलस्तर ने पूरे जिले में बाढ़ की स्थिति को गंभीर बना दिया है। खासकर गंगा का पानी रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंचने से प्रशासन और ग्रामीणों की चिंता बढ़ी हुई है। वहीं मही नदी का बांध टूटने से कई गांवों में अचानक पानी फैल गया है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता तटबंधों की निगरानी, प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और राहत शिविरों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की है। आने वाले समय में नदियों का जलस्तर और बढ़ता है या इसमें कमी आती है, इसी पर आगे की स्थिति काफी हद तक निर्भर करेगी।
