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चिराग पासवान के इस्तीफे की मांग पर NDA में घमासान, आरक्षण को लेकर मांझी ने साधा निशाना; बोले- ‘गरीबों का दर्द नहीं देखना चाहते’

लाइव सिटीज, पटना: बिहार में आरक्षण के मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर ही बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के प्रमुख जीतन राम मांझी ने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के रुख पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग तक कर दी है। मांझी का कहना है कि आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर गरीब और वंचित वर्गों के हितों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

मांझी ने चिराग पासवान के उस रुख पर आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने आरक्षण व्यवस्था में बदलाव और ‘कोटा के अंदर कोटा’ जैसे मुद्दे पर अपनी राय रखी थी। मांझी का तर्क है कि आरक्षण का लाभ समाज के उन वर्गों तक पहुंचना चाहिए, जिन्हें वास्तव में इसकी जरूरत है। उनका कहना है कि इस विषय पर सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी करने के बजाय सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के हित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

मांझी ने क्यों उठाया चिराग के इस्तीफे का मुद्दा?

जीतन राम मांझी ने कहा कि अगर चिराग पासवान आरक्षण के सवाल पर गरीबों और वंचित तबके के हितों को स्वीकार नहीं करते हैं, तो उन्हें अपने पद पर बने रहने के बारे में विचार करना चाहिए। मांझी के बयान से साफ है कि वह आरक्षण के भीतर अधिक जरूरतमंद वर्गों को अलग से लाभ देने की व्यवस्था के पक्ष में हैं।
उन्होंने कहा कि समाज के सभी लोगों को एक समान स्थिति में रखकर आरक्षण का लाभ देना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, लंबे समय से सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों तक सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण का लाभ पहुंचाने की कोशिश की जाती रही है। ऐसे में यह देखना जरूरी है कि वास्तविक रूप से इसका फायदा किस वर्ग को मिल रहा है।

‘गरीब लोगों को देखना नहीं चाहते’ वाला बयान

मांझी ने चिराग पासवान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि वह गरीब लोगों की स्थिति को देखना नहीं चाहते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि आरक्षण के लाभ को लेकर समाज के भीतर जो असमानता है, उसे दूर करने के लिए गंभीर चर्चा की जरूरत है।
मांझी का मानना है कि आरक्षण का उद्देश्य केवल कुछ लोगों को लगातार लाभ पहुंचाना नहीं, बल्कि उन समुदायों और परिवारों को आगे बढ़ाना है जो आज भी आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आरक्षण के वास्तविक उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था की समीक्षा की जानी चाहिए।

NDA में बढ़ सकती है खींचतान

आरक्षण को लेकर मांझी और चिराग पासवान के बीच सामने आया यह मतभेद NDA के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों नेता NDA का हिस्सा हैं, लेकिन आरक्षण के मुद्दे पर उनके विचार अलग-अलग नजर आ रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर गठबंधन के भीतर और बयानबाजी देखने को मिल सकती है।

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