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बिहारशरीफ मंडल कारा बना नशामुक्ति अभियान का मॉडल, जेल में नशीले पदार्थों पर पूर्ण रोक

लाइव सिटीज, नालंदा: बिहार सरकार जहां पूरे राज्य में नशामुक्ति अभियान को प्रभावी बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है, वहीं बिहारशरीफ मंडल कारा इस अभियान की सफलता का एक अनोखा उदाहरण बनकर सामने आया है। जेल प्रशासन की कड़ी निगरानी और सख्त व्यवस्था का असर यह है कि मंडल कारा परिसर में किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थ की उपलब्धता लगभग समाप्त हो चुकी है। यहां तक कि बंदियों को खैनी जैसी सामान्य नशे की सामग्री भी नहीं मिल पा रही है।

हाल ही में जमानत पर जेल से बाहर आए कुछ बंदियों ने नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर जो जानकारी दी, उसने सभी को चौंका दिया। बंदियों के अनुसार, खैनी की लत से परेशान कुछ कैदी अपनी तलब शांत करने के लिए जेल परिसर में लगे नीम के पेड़ों की छाल तक निकालकर चबाने को मजबूर हैं। यह दावा जेल प्रशासन की सख्ती और नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की प्रभावशीलता को दर्शाता है।

जानकारी के मुताबिक वर्तमान में बिहारशरीफ मंडल कारा में 800 से अधिक बंदी निरुद्ध हैं। जेल प्रशासन द्वारा नियमित रूप से सभी वार्डों की तलाशी ली जाती है तथा संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाती है। सघन जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई के कारण जेल के अंदर नशे का कोई नेटवर्क विकसित नहीं हो पाया है। जिला प्रशासन और पुलिस की टीम भी समय-समय पर कारा परिसर में छापेमारी करती है, लेकिन अब तक किसी भी प्रकार का नशीला पदार्थ या प्रतिबंधित सामग्री बरामद नहीं हुई है। कारा प्रशासन का कहना है कि नशामुक्त वातावरण का सकारात्मक प्रभाव बंदियों के स्वास्थ्य और व्यवहार पर भी दिखाई दे रहा है। पहले जहां कई बंदी नशे की लत से जुड़ी शारीरिक एवं मानसिक समस्याओं से जूझते थे, वहीं अब उनकी दिनचर्या अधिक अनुशासित हुई है और स्वास्थ्य में भी सुधार दर्ज किया गया है।

मंडल कारा के अधीक्षक अभिषेक पांडेय ने बताया कि यह सकारात्मक बदलाव नालंदा के जिलाधिकारी कुंदन कुमार के मार्गदर्शन और कारा महानिरीक्षक रजनीश सिंह के निर्देशों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि जेल प्रशासन नशा मुक्ति को लेकर वरीय अधिकारियों के निर्देशों को धरातल पर उतारने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। बंदियों को नशे से होने वाली बीमारियों और उसके दुष्परिणामों के प्रति भी लगातार जागरूक किया जा रहा है। नशे के खिलाफ मंडल कारा बिहारशरीफ की यह मुहिम अब राज्य की अन्य जेलों के लिए भी एक प्रेरणादायक मॉडल बनती जा रही है।

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