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जनजातीय क्षेत्रों में पर्यटन बढ़ाने के लिए वाल्मीकिनगर, कैमूर में हेलीपोर्ट विकसित होंगे:मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी

लाइव सिटीज, पटना: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को घोषणा की कि राज्य सरकार जनजातीय आबादी वाले क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वाल्मीकिनगर और कैमूर में हेलीपोर्ट विकसित करेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ावा देने और जनजातीय समुदाय को वैकल्पिक आजीविका उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ‘जनजातीय क्षेत्रों में होम-स्टे विकास’ योजना शुरू करेगी।चौधरी ने यहां ‘जनजातीय गौरव उत्सव 2026’ के तहत ‘बिरसा लिव्स इन न्यू भारत योजना’ के छात्रवृत्ति लाभार्थियों से संवाद के दौरान यह घोषणा की।

इस वर्ष भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती मनाई जा रही है। बिरसा मुंडा (1875-1900) जनजातीय नेता और स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ मुंडा विद्रोह का नेतृत्व किया था। जनजातीय अधिकारों और स्वशासन के लिए उनका संघर्ष उन्हें आदिवासी समुदायों के लिए प्रतिरोध और सशक्तीकरण का प्रतीक बनाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘राज्य सरकार ने क्षेत्र में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए वाल्मीकिनगर और कैमूर में हेलीपोर्ट विकसित करने का निर्णय लिया है। जनजातीय समुदायों के बीच होम-स्टे सुविधाएं शुरू की जाएंगी, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और लोगों को जनजातीय संस्कृति को बेहतर तरीके से समझने का अवसर मिलेगा। जनजातीय समुदाय के उत्थान और समृद्धि के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भगवान बिरसा मुंडा को स्मरण करते हुए अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। 

उन्होंने कहा, ‘‘उनके लिए जमीनी स्तर पर भी काम किया जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा बिहार में एकलव्य विद्यालय स्थापित किए गए हैं, जिससे अनुसूचित जनजाति समुदाय के बच्चों को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की ‘पोस्ट-मैट्रिक’ छात्रवृत्ति योजना से करीब 1.04 लाख अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थी लाभान्वित हुए हैं, जिनमें अनुसूचित जनजाति के 4,155 विद्यार्थी हैं। उन्होंने कहा कि ‘प्री-मैट्रिक’ छात्रवृत्ति योजना के तहत इस वर्ष 20.46 लाख छात्र लाभान्वित हुए हैं, जिनमें 1.41 लाख अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थी हैं।

उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय के विकास के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और प्रत्येक प्रखंड में मॉडल विद्यालय खोले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजाति त्वरित विकास योजना के तहत पश्चिमी चंपारण में 180 करोड़ रुपये की विकास योजनाएं पूरी की गई हैं।

मुख्यमंत्री ने जनजातीय क्षेत्रों में मैराथन प्रतियोगिताओं के आयोजन की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले को एक लाख रुपये, द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले को 75 हजार रुपये और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले को 50 हजार रुपये पुरस्कार स्वरूप दिए जाएंगे। इसके अलावा कैमूर के पहाड़ी क्षेत्रों में एक डिग्री कॉलेज भी खोला जाएगा।

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