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विराट रामायण मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं का सैलाब, एसडीएम ने व्यवस्थाओं का लिया जायजा

लाइव सिटीज, पटना: विश्व का सबसे बड़ा 33 फीट लंबा शिवलिंग विराट रामायण मंदिर प्रांगण में पहुंच गया है। शिवलिंग को तमिलनाडू के महाबलीपुरण से केशरिया स्थित विराट रामायण मंदिर पहुंचने में करीब 47 दिन का समय लग गया। रास्ते में यात्रा के दौरान दर्शन के लिए अधिक भीड़ जुट रही थी। बिहार पहुंचने पर गोपालगंज से शिवलिंग को डुमरिया पुल होते हुए विराट रामायण मंदिर में  सोमवार की रात में ही पहुंचाना पड़ा। मंदिर प्रांगण शिविलिंग के कारण मेला का रूप धारण कर लिया है। प्रांगण में अपर भीड़ हो रही है।

बुधवार को एसडीएम शिवानी शुभम और मंदिर के सचिव सारण कुणाल के नेतृत्व में मंदिर प्रांगण और शिवलिंग के लिए किए गए कार्यों का निरीक्षण व समीक्षा की।बाकी कार्यों को जल्द पूरा करने का निर्देश दिया गया।

शिविलिंग लेकर चलने वाला 96 चक्के का ट्रक  जहां भी रूक रहा था वहा दर्शन के लिए भारी भीड़ जमा हो जा रही थी। शिवलिंग लदा ट्रक जिस इलाके से गुजर रहा था। उस इलाके के महिला-पुरूष दर्शन के लिए घर के बाहर खड़ा हो जा रहे थे। भक्त जल और फूल चढ़ा रहे थे।

महावीर स्थान न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल ने बताया कि सिर्फ ट्रैफिक जाम और सुरक्षा के मद्देनजर शिवलिंग को विराट रामायण मंदिर में खड़ा कर दिया गया है। अब विराट रामायण मंदिर प्रांगण में भी दर्शन करने के लिए भी भक्तों की भीड़ जमा हो जा रही है। इसके अलावा शिवलिंग को स्थापित करने के लिए भोपाल से 750 टन क्षमता वाला क्रेन मंगाया गया है। 17 जनवरी को पीठ पूजन के बाद शिवलिंग को क्रेन की मदद से स्थापित कर दिया जाएगा। एक्सपर्ट के देखरेख में शिवलिंग को स्थापित करने में तीन से चार घंटे का समय लग सकता है। स्थापित करने के पहले विराट रामायण मंदिर प्रांगण में अस्थाई मंडप बनाया जा रहा है। जहां पूजा-पाठ संपन्न होगा। वैसे शिवलिंग स्थापना के दिन काफी संख्या में भक्तों के पहुंचने की उम्मीद की जा रही है। शिवलिंग स्थापना के दिन शिवलिंग पर पुष्प वर्षा होगी। इसके लिए हेलीकाप्टर भी मंगाया गया है। लोगों से अपील भी की जा रही है कि वे स्थापना के दिन विराट रामायण मंदिर पहुंचे। स्थापना के मौके पर विभिन्न शहरों से लोग आने की इच्छा जताई हैं।

आयोध्या से पंडित भी बुलाए गए हैं। शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा बाद में होगी। पर स्थापित करने से पहले विधिवत पूजा-पाठ करके ही शिविलिंग को स्थापित किया जाएगा।  हर संभव कोशिश हो रही है कि विराट रामायण मंदिर का निर्माण 2030 तक करा दिया जाय। जिससे बिहार  भी विश्व के धार्मिक स्थलों की सूची में पहले नंबर पर पहुंच जाय। साथ ही साथ यह पद्मश्री आचार्य किशोर कुणाल का ड्रीम प्रोजेक्ट है। विराट रामायण मंदिर में शिवलिंग के स्थापित और मंदिर के निर्माण हो जा ने पर आचार्य किशोर कुणाल जी (पापा) का सपना भी साकार हो जाएगा।   

साथ ही शिवलिंग का जलाभिषेक कराने के लिए पांच नदियों का जल मंगाया गया है। इसमें हरिद्वार, प्रयागराज, गंगोत्री, कैलाश मानसरोवर, सोनपुर आदि शामिल है। इस शिवलिंग का जलाभिषेक करने का मतलब है 1008 शिवलिंग का जलाभिषेक। क्योंकि यह शिवलिंग सहस्त्रलिंगम है। शिवलिंग का निर्माण तमिलनाडु के महाबलीपुरम के पट्टीकाडू गांव में बीते दस साल से हो रहा था। 33 फीट का शिवलिंग एक ब्लैक ग्रेनाइट मोनोलिथ पत्थर से निर्मित है। कलाकारों के 10 साल के अथक परिश्रम से यह शिवलिंग बनकर तैयार हुआ है।  शिवलिंग का वजन 210 मीट्रिक टन है और इस पर 1008 सहस्त्रलिंगम तैयार किया गया है।

रामायण मंदिर का  निर्माण महावीर मंदिर न्यास समिति द्वारा कराया जा रहा है। विराट रामायण मंदिर का प्रवेश द्वार,गणेश स्थल, सिंह द्वार, नंदी, शिवलिंग, गर्भ गृह का पाइलिंग (नींव) आदि का काम पूरा हो गया है। अब नंदी के निर्माण की तैयारी की प्रक्रिया शुरू की गई है।  आकार में यह मंदिर 1080 फीट लंबा और 540 फीट चौड़ा होगा। इसमें कुल 18 शिखर और 22 मंदिर होंगे और मुख्य शिखर की ऊंचाई 270 फीट,चार शिखर की ऊंचाई 180 फीट, एक शिखर की ऊंचाई 135 फीट, आठ शिखर की ऊंचाई 108 फीट और एक शिखर की ऊंचाई 90 फीट होगी। पटना से विराट रामायण की दूरी 120 किलोमीटर है। मंदिर का प्रांगण 120 एकड़ में फैला हुआ है। भक्तों से अपील है कि 17 जनवरी को कैथवलिया स्थित विराट रामायण मंदिर पहुंचे। उसी दिन शिवलिंग की विधि-विधान से स्थापना होनी है।

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