लाइव सिटीज, पटना: बिहार विधानसभा में सोमवार को पत्रकार पेंशन सम्मान योजना पर नीतीश सरकार घिर गई। विपक्ष की ओर भाकपा माले के विधायक अजय कुमार ने इस मामले पर सरकार से सवाल पूछा। इस पर मंत्री विजय चौधरी ने जवाब दिया। लेकिन, माले विधायक ने पेंशन के लिए लागू के गई शर्तों को लेकर फिर से सवाल पूछ दिया। उन्होंने जेपी सेनानियों की तरह ही पत्रकारों के लिए कमेटी बनाने की बात कही।
इसके बाद मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि अन्य राज्यों की तरह ही बिहार में भी लागू है। इस पर माले विधायक संतुष्ट नहीं हुए। बात में विधानसभा अध्यक्ष को बीच में आना पड़ा। उन्होंने सरकार के विचार करने की बात कहकर माले विधायक को चुप करा दिया।
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के मंत्री विजय चौधरी ने पत्रकारों की पेंशन के मुद्दे पर कहा कि पेंशन के लिए जो पात्रता (अनुमान्यता) की शर्तें निर्धारित हैं, वे केवल बिहार में ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी लागू हैं। 20 वर्ष की सेवा अनिवार्य है। टीडीएस और पीएफ बीस वर्षों की नौकरी का प्रमाण होते हैं। यदि किसी पत्रकार ने 20 वर्ष की सेवा की है, तो जिस संस्थान में उन्होंने कार्य किया है, उसका प्रमाण प्रस्तुत करने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था पारदर्शिता के लिए है। मंत्री ने यह भी कहा कि बिहार सरकार जितनी पेंशन राशि देती है, उतनी किसी अन्य राज्य में नहीं दी जाती। इतना ही नहीं, योजना का लाभ पा रहे पत्रकारों के असमय निधन के बाद फैमिली पेंशन की जो राशि दी जाती है, वह भी अन्य राज्यों में उपलब्ध नहीं है।
इसके बाद विभूतिपुर से माले विधायक अजय कुमार ने कहा कि पत्रकार जीवन भर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में सेवा करते हैं। बिहार के कई प्रखंडों और जिलों में पत्रकार बिना टीडीएस कटौती और पीएफ सुविधा के विभिन्न संस्थानों के लिए कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बिहार में केवल 75 पत्रकारों को ही पेंशन का लाभ मिल रहा है। क्या बिहार में सिर्फ 75 पत्रकार ही हैं? उन्होंने कहा कि पीएफ और टीडीएस कटौती की शर्त कंपनियों पर निर्भर करती है। मेरा प्रश्न है कि जिस तरह जेपी सेनानियों की तरह पत्रकारों की कमेटी (विधानसभा के अंदर ही) बनाकर, पत्रकारों की पुष्टि करवाकर सरकार उन्हें पेंशन सरकार देना चाहती है या नहीं?
