लाइव सिटीज, मुजफ्फरपुर: बिहार में विधान परिषद की तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र सीट के लिए होने वाले चुनाव से पहले आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का मामला सामने आया है। जनसुराज समर्थित उम्मीदवार श्यामनंदन कुमार यादव के खिलाफ मुजफ्फरपुर में प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोप है कि चुनाव प्रचार की निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी ऑनलाइन माध्यम से प्रचार किया जा रहा था। प्रशासन की जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की।
क्या है पूरा मामला?
मुजफ्फरपुर में तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए 23 अक्टूबर को होने वाले एमएलसी चुनाव को लेकर प्रशासन सतर्क है। चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता का पालन सुनिश्चित करने के लिए निगरानी की जा रही है। इसी क्रम में गुरुवार, 22 अक्टूबर को प्रशासन को सूचना मिली कि जनसुराज समर्थित उम्मीदवार श्यामनंदन कुमार यादव की ओर से प्रचार समाप्त होने के बाद भी ऑनलाइन माध्यम से चुनाव प्रचार किया जा रहा है।शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने मामले का सत्यापन कराया। जांच में प्रचार से जुड़ी सामग्री और हैंडबिल मिलने की बात सामने आई। इसके बाद संबंधित उम्मीदवार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई।
कार्यपालक दंडाधिकारी के बयान पर प्राथमिकी
मामले में मुजफ्फरपुर के काजीमोहम्मदपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, यह कार्रवाई पूर्वी क्षेत्र के कार्यपालक दंडाधिकारी रामनाथ कुमार के बयान पर की गई। उन्होंने मामले की जांच के लिए पुलिस से सहयोग मांगा था।
काजीमोहम्मदपुर के थानाध्यक्ष चंद्रभूषण कुमार सिंह ने प्राथमिकी दर्ज किए जाने की पुष्टि की। जांच के दौरान चुनाव प्रचार से संबंधित सामग्री और हैंडबिल की प्रतियां मिलने का उल्लेख किया गया है। इन सामग्रियों को साक्ष्य के तौर पर प्राथमिकी के साथ संलग्न किए जाने की जानकारी दी गई है।
प्रचार बंद होने के बाद प्रचार करना क्यों है उल्लंघन?
चुनाव में मतदान से पहले प्रचार की एक निर्धारित समय-सीमा होती है। मतदान समाप्त होने के समय से पहले के 48 घंटे की अवधि को साइलेंस पीरियड यानी प्रचार बंद रहने की अवधि कहा जाता है। इस दौरान मतदाताओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से चुनाव प्रचार नहीं किया जा सकता।
यह प्रतिबंध केवल सार्वजनिक सभाओं या रैलियों तक सीमित नहीं है। ऑनलाइन माध्यम से प्रचार करने पर भी चुनाव संबंधी नियम लागू होते हैं। ऐसे में यदि प्रचार की समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी उम्मीदवार या उनके समर्थक चुनाव प्रचार करते हैं, तो इसे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन माना जा सकता है।इसी आधार पर मुजफ्फरपुर प्रशासन ने मामले की जांच कर प्राथमिकी दर्ज कराई है।
पुलिस ने शुरू की कानूनी कार्रवाई
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई का उद्देश्य चुनाव को निष्पक्ष और नियमों के अनुरूप संपन्न कराना है।
हालांकि, प्राथमिकी दर्ज होने का अर्थ यह नहीं है कि उम्मीदवार पर लगे आरोप अदालत में साबित हो गए हैं। मामले में आरोपों की जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। उपलब्ध रिपोर्ट में उम्मीदवार की ओर से इस प्राथमिकी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मतदान से पहले प्रशासन सख्त
बिहार में 23 अक्टूबर को विधान परिषद की आठ सीटों के लिए मतदान निर्धारित है। चुनाव से ठीक पहले मुजफ्फरपुर में हुई इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि प्रशासन प्रचार संबंधी नियमों के पालन को लेकर सतर्क है। चुनावी प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों और उनके समर्थकों को निर्धारित समय-सीमा तथा अन्य आचार संहिता संबंधी निर्देशों का पालन करना जरूरी है।
