लाइव सिटीज, पटना: बिहार की राजनीति में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के बयानों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। चिराग पासवान ने मांझी की उस टिप्पणी पर आपत्ति जताई है, जिसमें उन्होंने दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे युवाओं के लिए ‘तिलचट्टा’ शब्द का इस्तेमाल किया था। चिराग ने कहा कि राजनीति करने के लिए कुछ भी बोल देना उचित नहीं है। युवाओं को इस तरह के शब्दों से संबोधित करना जायज नहीं है।चिराग पासवान ने युवाओं के आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि छात्र और युवा देश की दिशा बदलने की क्षमता रखते हैं। ऐसे में उनके विचारों और मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उनके बयान को मांझी की टिप्पणी पर सीधी असहमति के तौर पर देखा जा रहा है।
युवाओं के लिए ऐसी भाषा पर जताई आपत्ति
चिराग पासवान ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं को अपने शब्दों का चयन सोच-समझकर करना चाहिए। युवाओं को अपमानजनक शब्दों से संबोधित करने से बचना चाहिए। उनके मुताबिक, केवल राजनीतिक चर्चा में बने रहने या अपनी बात रखने के लिए ऐसी भाषा का इस्तेमाल करना सही नहीं है।
दरअसल, दिल्ली में चुनावी प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के बीच यह विवाद सामने आया है। मांझी ने प्रदर्शनकारियों पर टिप्पणी करते हुए ‘तिलचट्टा’ और ‘झींगुर’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। इस बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आने लगी है।
छात्र आंदोलन को बताया लोकतंत्र का हिस्सा
चिराग पासवान ने युवाओं के आंदोलनों के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में छात्र आंदोलनों ने कई बार बदलाव की दिशा तय की है। युवाओं को अपनी मांगें रखने और सरकार से सवाल पूछने का अधिकार है।हालांकि, उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन की जरूरत पर भी बल दिया। लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराने का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था और आम लोगों की सुविधाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए।
एसआईआर और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर भी बोले चिराग
चिराग पासवान ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने विपक्ष के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी राजनीतिक दल को चुनावी प्रक्रिया पर आपत्ति है, तो उसे अपनी बात तथ्यों के साथ रखनी चाहिए।इस मुद्दे पर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच पहले से ही मतभेद हैं। विपक्ष चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहा है, जबकि चिराग ने अपनी प्रतिक्रिया में लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत विरोध दर्ज कराने और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने पर जोर दिया।
