लाइव सिटीज, पटना: खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के मंत्री अशोक चौधरी ने आज बयान जारी करते हुए कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अंतर्गत पात्र लाभुकों को जन वितरण प्रणाली (PDS) विक्रेताओं के माध्यम से बायोमेट्रिक सत्यापन के उपरांत निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। इस पूरी व्यवस्था में जन वितरण प्रणाली विक्रेताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मंत्री चौधरी ने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जी की भावनाओं के अनुरूप, लक्षित जन वितरण प्रणाली को और अधिक सुदृढ़, प्रभावी एवं सुचारु बनाने के साथ-साथ जन वितरण प्रणाली विक्रेताओं की आर्थिक व्यवहार्यता (Economic Viability) बढ़ाना भी आवश्यक है। इसी उद्देश्य से जन वितरण प्रणाली की दुकानों के माध्यम से खाद्यान्न के अतिरिक्त अन्य उपयोगी वस्तुओं की बिक्री की संभावनाओं का अध्ययन करने के लिए श्री उपेन्द्र कुमार, विशेष सचिव, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार, पटना की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है।
उन्होंने बताया कि गठित समिति में श्री राकेश रमण, महाप्रबंधक, निगम मुख्यालय, पटना; श्री चित्रगुप्त कुमार, विशिष्ट पदाधिकारी अनुभाजन, पटना; श्रीमती सृष्टि प्रिया, विशेष कार्य पदाधिकारी; श्री अमित रंजन, अवर सचिव; श्री दयानन्द प्रसाद, प्रदेश महामंत्री, फेयर प्राइस डीलर्स एसोसिएशन; श्री वरुण कुमार सिंह तथा श्री गौरव लाभ, प्रदेश महामंत्री, फेयर प्राइस डीलर्स एसोसिएशन को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। श्रीमती सृष्टि प्रिया को समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है।
मंत्री चौधरी ने कहा कि समिति को निर्देशित किया गया है कि राज्य में जन वितरण प्रणाली विक्रेताओं की आर्थिक व्यवहार्यता बढ़ाने के लिए सभी संभावित पहलुओं का विस्तृत अध्ययन किया जाए। साथ ही, अन्य राज्यों में इस दिशा में लागू व्यवस्थाओं एवं किए जा रहे नवाचारों की भी समीक्षा की जाएगी, ताकि बिहार के लिए उपयोगी एवं व्यावहारिक व्यवस्था विकसित की जा सके।
उन्होंने कहा कि समिति द्वारा इस संबंध में मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure–SOP) तैयार करने के लिए विस्तृत विचार-विमर्श एवं बैठकें आयोजित की जाएंगी। समिति को 15 दिनों के भीतर अपना मन्तव्य एवं परामर्श विभाग को सौंपने का निर्देश दिया गया है।
मंत्री चौधरी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य जन वितरण प्रणाली को केवल खाद्यान्न वितरण तक सीमित न रखते हुए इसे और अधिक सक्षम, आर्थिक रूप से व्यवहार्य, पारदर्शी एवं जनोपयोगी बनाना है। जन वितरण प्रणाली विक्रेताओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होने से वितरण व्यवस्था की निरंतरता और प्रभावशीलता को भी और बेहतर किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि समिति की अनुशंसाओं एवं अन्य राज्यों की बेहतर व्यवस्थाओं का अध्ययन करने के बाद बिहार की परिस्थितियों के अनुरूप आवश्यक निर्णय लिया जाएगा। सरकार का प्रयास रहेगा कि जन वितरण प्रणाली से जुड़े विक्रेताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे लाभुकों को भी अतिरिक्त आवश्यक वस्तुएँ सहज रूप से उपलब्ध हो सकें।
