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शिक्षक दिवस से पहले बिहार में शिक्षकों का डिजिटल मोर्चा, X पर ट्रेंड हुआ #BiharTeachersNeed7thPay; सातवें वेतनमान की मांग तेज

लाइव सिटीज, पटना: शिक्षक दिवस से ठीक पहले बिहार में शिक्षकों ने सातवें वेतनमान की मांग को लेकर सोशल मीडिया पर बड़ा अभियान शुरू किया है। रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर #BiharTeachersNeed7thPay हैशटैग के जरिए बड़ी संख्या में शिक्षकों ने अपनी मांग सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की। शिक्षक संगठनों का कहना है कि राज्यकर्मी का दर्जा मिलने के बाद अब उन्हें सातवें वेतन आयोग के अनुरूप वेतन संरचना और वित्तीय लाभ दिया जाना चाहिए।

शिक्षक दिवस पर सरकार से घोषणा की उम्मीद

देशभर में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। बिहार के शिक्षक इस मौके को अपनी लंबित मांग को सरकार के सामने मजबूती से रखने के अवसर के तौर पर देख रहे हैं। डिजिटल अभियान से जुड़े शिक्षकों की मांग है कि शिक्षक दिवस पर सरकार सातवें वेतनमान को लेकर कोई ठोस घोषणा करे।

शिक्षकों ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और शिक्षा विभाग से इस मुद्दे पर जल्द निर्णय लेने की अपील की है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि शिक्षक दिवस केवल सम्मान का दिन नहीं होना चाहिए, बल्कि शिक्षकों की आर्थिक और सेवा संबंधी मांगों पर भी सरकार को सकारात्मक कदम उठाना चाहिए।

क्यों उठ रही है सातवें वेतनमान की मांग?

शिक्षक संगठनों के मुताबिक बिहार में राज्यकर्मी का दर्जा हासिल कर चुके शिक्षकों की प्रमुख मांग सातवें वेतन आयोग के अनुरूप पूर्ण वेतनमान, पे मैट्रिक्स और संबंधित वित्तीय लाभ देने की है। उनका तर्क है कि राज्यकर्मी का दर्जा मिलने के बाद वेतन से जुड़े लाभों में भी समानता होनी चाहिए। बिहार विशिष्ट अध्यापक प्रधान शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष आनंद कौशल सिंह ने हाल में सरकार से करीब 5.5 लाख शिक्षकों को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप पूर्ण वेतनमान और फिटमेंट मैट्रिक्स का लाभ देने की मांग की थी।

इस बार शिक्षकों ने सड़क पर उतरने के बजाय डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपनी आवाज बनाने का रास्ता चुना। अभियान के दौरान शिक्षकों ने एक ही हैशटैग के साथ पोस्ट करते हुए सरकार का ध्यान वेतनमान के मुद्दे की ओर खींचने की कोशिश की।

बता दें कि शिक्षक संगठनों से जुड़े लोगों का दावा है कि #BiharTeachersNeed7thPay ने X की ट्रेंडिंग सूची में काफी ऊपर जगह बनाई और अभियान को व्यापक स्तर पर समर्थन मिला। हालांकि ट्रेंडिंग रैंक से जुड़े दावे अलग-अलग रिपोर्टों में अलग तरह से बताए गए हैं, इसलिए इसे शिक्षक संगठनों का दावा मानकर ही देखा जाना चाहिए।

केवल वेतन नहीं, भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का भी मुद्दा

शिक्षकों का कहना है कि वेतनमान का सवाल सिर्फ वर्तमान वेतन बढ़ने तक सीमित नहीं है। इसका असर भविष्य की आर्थिक सुरक्षा, वेतन वृद्धि, सेवानिवृत्ति लाभ और परिवार की वित्तीय योजना पर भी पड़ता है। यही वजह है कि शिक्षक संगठन सातवें वेतन आयोग के अनुरूप वेतन निर्धारण की मांग को लगातार उठा रहे हैं।

उनका कहना है कि महंगाई बढ़ने के साथ परिवार की शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और रोजमर्रा की जरूरतों का खर्च भी बढ़ रहा है। ऐसे में वेतन संरचना में उचित संशोधन शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण है।

लंबित वेतन और अन्य वित्तीय मुद्दे भी उठे

सातवें वेतनमान की मांग के साथ कुछ जगहों पर शिक्षकों के लंबित वेतन भुगतान का मुद्दा भी सामने आया है। पूर्णिया में भी शिक्षकों की लंबित वेतन राशि के भुगतान और सातवें वेतनमान को लागू करने की मांग को सार्वजनिक रूप से उठाया गया है। इससे साफ है कि शिक्षकों के बीच वेतन से जुड़े कई मुद्दे एक साथ चर्चा में हैं।

वहीं, शिक्षा विभाग की ओर से 2026 में नियोजित शिक्षकों के प्रशिक्षित वेतनमान और सेवा लाभ से संबंधित कई आदेश भी जारी किए गए हैं। इन आदेशों में प्रशिक्षण पूरा होने की तिथि से वेतन एवं एरियर जैसे मामलों को लेकर निर्देश दिए गए हैं। हालांकि ये आदेश सातवें वेतन आयोग की पूरी मांग के समान नहीं हैं।

आपको बता दें कि बिहार में हाल के दिनों में शिक्षक भर्ती और शिक्षकों से जुड़े मुद्दे लगातार चर्चा में रहे हैं। TRE-4 को लेकर अभ्यर्थियों के आंदोलन के बीच सरकार ने परीक्षा एक चरण में कराने की मांग स्वीकार की है। ऐसे माहौल में शिक्षक संगठनों की ओर से सातवें वेतनमान की मांग ने शिक्षा विभाग के सामने एक और महत्वपूर्ण विषय खड़ा कर दिया है।

अब शिक्षकों की नजर 5 सितंबर यानी शिक्षक दिवस पर है। शिक्षक संगठनों को उम्मीद है कि सरकार उनकी मांग पर सकारात्मक फैसला लेकर सातवें वेतनमान को लेकर स्थिति स्पष्ट करेगी। फिलहाल डिजिटल अभियान के जरिए शिक्षकों ने अपनी मांग को प्रदेश से लेकर सोशल मीडिया के व्यापक मंच तक पहुंचा दिया है।

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