लाइव सिटीज, पटना: शुक्रवार 23 जनवरी 2026 यानि आज माघ शुक्ल पंचमी के दिन पूरे बिहार समेत देशभर में सरस्वती पूजा श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जा रही है. यह पर्व माघ शुक्ल पंचमी को होने के कारण इसे वसंत पंचमी भी कहा जाता है.
विद्या, बुद्धि, वाणी और कला की देवी मां सरस्वती की आराधना का यह दिन विद्यार्थियों, शिक्षकों, कलाकारों और ज्ञान साधकों के लिए विशेष महत्व रखता है.
मां सरस्वती की पूजा विधि बताते हुए पंडित राजन उपाध्याय ने कहा कि सरस्वती पूजा में शुद्धता और सात्विकता का विशेष ध्यान रखना चाहिए. सबसे पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें. पूजा स्थल को साफ कर पीले या सफेद वस्त्र पर मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें.
मां को पीले फूल, अक्षत, हल्दी, केसर, मिठाई और फल अर्पित करें. कलम, किताब, वाद्य यंत्र जैसे शिक्षा और कला से जुड़े उपकरणों को मां के चरणों में रखें. इसके बाद ‘ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः’ मंत्र का जाप करें और आरती करें. प्रसाद में सीजनल फल, खीर या पीले रंग की मिठाई विशेष रूप से अर्पित की जाती है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पूजा करने से बुद्धि तीव्र होती है और पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ती है. पंडित राजन उपाध्याय कहते हैं कि विद्यार्थियों के लिए यह दिन विशेष होता है. मान्यता है कि मां सरस्वती की आराधना से स्मरण शक्ति बढ़ती है और जीवन में सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है. कई जगहों पर छोटे बच्चों का विद्यारंभ संस्कार भी इसी दिन कराया जाता है.
